Thursday, November 19, 2015

Punishment



कल सलोनी-सुहाना का ऑटो नहीं आया. ऑटो स्टॉप पर वे बहुत देर तक इंतज़ार करती रहीं. जब बहुत देर हो गयी तो उन्होंने रोना शुरू कर दिया.

माँ ने समझाया, ’कितना अच्छा हुआ कि आज ऑटो नहीं आया. आज स्कूल से छुट्टी!’

बेटियां और ज़ोर से रोने लगीं और रो-रो कर कहने लगीं, ‘आपको क्या पता, आज हमारा टेस्ट है. अब हमारे टेस्ट का नंबर कैसे जुड़ेगा?’

 बेचारी काम काजू माँ!  फिर से समझाया, ’कोई बात नहीं. मैं स्कूल में बात कर लूँगी.’

‘नहीं, आपको पहुँचाना होगा’ उन्होंने आँसू पोंछते हुए कहा. 

इतने में अगल बगल खड़े लोगों के चेहरों पर बल पड़ने लगे थे. चेहरा पढ़ने वाले जानते हैं कि उनके चेहरों के भाव यक़ीनन यही कह रहे थे.. ‘कैसी माँ है? बच्चियों के भविष्य की कोई चिंता नहीं!’

बड़ी मुश्किल से माँ ने बच्चियों को समझाया और ये भी कहा कि आने दो ऑटोवाले को कल उसकी ख़बर लेती हूँ.’

अगले दिन अपनी माँ का हाथ पकड़ दोनों तेज़ क़दमों से अपने स्टॉप पहुँचीं. ऑटोवाला बीते दिन की भरपाई करने के लिए कुछ जल्दी ही स्टॉप पर पहुँच गया था. माँ उसे कुछ कहती कि उसके पहले ही सलोनी और सुहाना ने अपनी मीठी-कड़क आवाज़ में डांटना शुरू कर दिया,’ कल आप आए भी नहीं और फ़ोन भी नहीं किए. अब बताइए आपको punishment मिलना चाहिए?’

बच्चियों से डांट सुन ऑटोवाले ने मुस्कुराकर कहा, ‘एकदम मिलना चाहिए’.

‘आपका punishment यही है कि अब आप रोज़ टाइम पर आइएगा,’ सलोनी ने बहुत गंभीर होकर कहा.
‘और नहीं आइएगा ना, तो punishment ज़्यादा हो जाएगा,’ सुहाना ने धमकाया.

‘सजा जादा मत कीजिएगा भाई!  हम एकदम टाइम पर आ जाएंगे,’ ऑटोवाले ने ऑटो स्टार्ट करते हुए कहा.

 अब चलिए फर्र से,’ दोनों बहनों ने लगभग एक साथ कहा और मुस्कुराते हुए ऑटो में बैठ गईं.


तू कौण है?

हफ्ते भर पहले की बात है. साहिर के दो दोस्त घर पर आये थे. एक का नाम है हर्षवर्धन और दूसरे का जयवर्धन. सभी सामने वाले कमरे में खेल रहे थे. थोड़ी देर बाद एक ने पूछा, ‘ साहिर तेरा नाम क्या है? तू कौण है? जैसे मैं हूँ लछमण, ये है राम. तू कौण है?’

साहिर ने कुछ सोचा और कहा, ‘ मैं हनुमान हूँ.’

सुनकर वह बच्चा हँसने लगा. बोला, ‘ तू हनुमाण है? हनुमाण तो राम और लछमण के सामने झुका रहता है. तू कौण है?’
उन्हें हँसता देख साहिर भी हँसने लगा. फिर कुछ सोचकर बोला, ‘ मैं रावण हूँ.’

यह सुनकर वह बच्चा और ज़ोर से हँसने लगा. बोला, ‘ रावण को तो लछमण ने ही मार गिराया था.’

दोनों बच्चों को हँसता देख साहिर भी हँसने लगा. फिर उसने जूंsss जूंsss की आवाज़ निकाली और अपनी गाड़ी से राम और लछमण की गाड़ी में टक्कर मार दी.

राम और लछमण की गाड़ी उलट गई थी. इसे देख पहले रावण हँसा. पीछे राम और लछमण भी. तीनों मिलकर ख़ूब हँसे. 
उस दिन राम लछमण और रावण तीनों मिलकर बहुत देर तक गाड़ी-गाड़ी खेलते रहे.
(15.06.10)

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