रिया है तो पाँच साल की मगर है घर की बॉस. घर में सभी पर उसका हुक्म चलता है. मम्मा, पापा, रावी दीदी, नानी-नाना, सब पर.
घुंघराले बाल, हल्की भूरी आँखें, खरगोश जैसे दांत, चिड़िया-सी महीन बोली, मगर अंदाज़
हाकिमाना... और हाँ दोस्त बनाने में बेहद selective. उसकी आँखें जैसे सामने वाले
को तौल लेती हैं... और कुछ ‘ख़ास’ ही उसके दोस्त बन पाते हैं, बाक़ी तो ‘आउट’ हो
जाते हैं.
हर मुश्किल में रिया अपनी रावी दीदी और मोहल्ले के ‘ख़ास’ बच्चों का मार्ग
प्रदर्शन करती है. मसलन किसे अपने गैंग में आने देना है किसे नहीं आने देना,
गुड़िया के बाल खुले रखने हैं या बाँधने, नहा कर खाना है या खाकर नहाना... वगैरह.
रात के नौ बजे थे. घर में तीन बच्चे. खेलने बाहर जा नहीं सकते. टी. वी. देखने
का मूड नहीं. अब क्या करें? रिया ने रास्ता दिखाया.
‘चलो सारे बच्चे एक-एक कुर्सी पर खड़े हो जाओ, अच्छा! मैं लीडर हूँ. मैं सारी
कुर्सियों के ऊपर चक्कर लगाऊँगी. तुम सब मेरे पीछे आना, और जो ज़मीन पे गिरा वो
‘आउट’. और हाँ, चक्कर तेज़ लगाना. दीदी तू डर मत, मम्मा कुछ नहीं बोलेगी... तो एक
दो तीन...’
चुटकी बजाते शानदार सोफ़े के ऊपर पकड़म-पकड़ाई का खेल शुरू हो गया. तीन बच्चों के
खिलखिलाने की आवाज़ से घर गूँज उठा. तीन बड़े जो अन्दर बैठे थे उनके अन्दर भी कुछ
गूँज रहा था—खामोशी से!
कभी-कभी उसके सवालों से माँ क्या सब चकरा जाते हैं. अभी कुछ दिन पहले की बात
है. रिया भगवान जी की मूर्ति को गौर से देख रही थी.
अचनाक पूछ बैठी, ‘मम्मा ये भगवान जी लोग इतनी jewelleries क्यों पहनते
हैं?’
मम्मा को कोई जवाब नहीं सूझा. मम्मा हँसने लगीं. बोलीं, ‘ रिया, मैंने तो कभी
ये सोचा ही नहीं. मुझे पता करना होगा.’
मम्मा की ओर से रिया का यह सवाल हमने कई बच्चों से पूछा. आईए जानें उनके जवाब
और जोड़ें अपने जवाब. जवाब देने में डरिएगा नहीं. भगवान जी मेरा ब्लॉग नहीं पढ़ते...
‘भगवान जी लोग बड़े ‘rich’ लोग हैं. उन्हीं
के पास दुनिया का सारा सोना है. वो जितना चाहें पहन सकते हैं. सब कुछ उनका है.’ शाश्वत
‘God दिखाना चाहते हैं कि वे स्पेशल हैं, इसलिए वे jewelleries पहनते हैं. उनके
हर गहने में एक power है. जब उनको ज़रूरत पड़ती है तो वे उसका इस्तेमाल करते हैं.’ माही
‘भगवान ने हमें गिफ्ट में ये दुनिया दी है. तो हम उन्हें return गिफ्ट में
jewelleries देते हैं. जब उनको गिफ्ट मिल जाता है तो वे पहन लेते हैं.’ नभु
‘वे गहने पहनते हैं क्योंकि वे महान हैं. उनका मन !’ साहिर
‘वो तो हमने ही उन्हें पहनाया है क्योंकि वे हमारी रक्षा करते हैं.’ रचना
‘पहनते हैंsss क्योंकि वे भगवान हैं.’ समीक्षा
सबसे छोटे बच्चे के सामने जब ये सवाल आया तो उसने कई सवाल किए.
‘jewelleries मतलब?’ मम्मा ने बताया...मतलब मम्मा जो ये सब पहनती है वही,
मंदिर जब हमलोग जाते हैं तब देखते हो न तुम? लोग उनको चढ़ावा भी देते हैं... इतना सुनते
ही आयुष्मान ने कहा, ‘ हाँ-हाँ मैं समझ गया. जो पैसा-वैसा आता है उनके पास, वही है
इसका मतलब. पर मम्मा मेरा एक question है... भगवान जी ने पैसा बनाया क्यों? क्या
हमलोग और भगवान जी बिना पैसे के नहीं रह सकते?’
है कोई जवाब?
कोई जवाब है?
रिया के सवाल के साथ अब हमारे पास आयुष्मान का भी सवाल है, ‘क्या हमलोग और
भगवान जी बिना पैसे के नहीं रह सकते !‘ इन्हें ढूँढने में मदद करें हमारी.
(जवाब देने वाले बच्चों की उम्र 5 से 10 साल के बीच है.)
छोटे बच्चों के लाजवाब सवाल-- रिया को कुछ नहीं कहो. इस अ मन इसतरह के सवाल करते रहे.
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