Sunday, December 6, 2015

बच्चे को कोई प्रॉब्लम नहीं थी न?


साहिर अक्सर सोने से पहले कहानी सुनाने की ज़िद करता है. आज भी सोने से पहले कहने लगा, ‘ऊ sss एक कहानी सुना दो.’

मुझ पर नींद की अम्मा नहीं नींद का पूरा ख़ानदान सवार था. मैंने कहा, ‘ऊ sss आज नहीं, आज बहुत नींद आ रही है.’
साहिर अड़ गया. उसने कहा—‘ एक छोटी-मोटी ही सुना दो.’

दिन में मैंने एक कहानी पढ़ी थी. मैंने वही कहानी सुनानी शुरू कर दी.

‘एक आदमी था. उसका नाम था मिरदंगिया. बात तब की है जब मिरदंगिया हट्टा-कट्टा जवान था. तब वो मृदंग बहुत बढ़िया बजाता था...’

‘मृदंग मतलब?’ साहिर ने पूछा

‘ढोलक की तरह एक चीज़ समझो.’ मैंने बताया.

‘एक बार बजाते-बजाते वह बहुत दूर निकल गया. मिरदंगिया ख़ुद भी झूम रहा था और लोग भी उसके साथ नाच उठे थे. जब उसने बजाना बंद किया तो सबने उसकी बहुत तारीफ़ की. अपनी तारीफ़ सुनकर मिरदंगिया फूला नहीं समा रहा था. वहीं पास में गाँव के दबंग ब्राह्मण का बच्चा खेल रहा था. मिरदंगिया ने बच्चे से पूछ दिया, ‘और बेटा जी कैसे हो?’  इतना कहते ही उसकी शामत आ गई. कुछ लट्ठमार लड़के वहाँ खड़े थे, उन्होंने मिरदंगिया की ख़ूब धुनाई की. मार खाकर मिरदंगिया डेढ़ साल के बच्चे की ओर बढ़ा और अपने कान पकड़ कर बोला, ‘ माफ़ कर दो बाप जी, आज से आपको बाप ही कहूँगा. अब तो ठीक है न!’

कहानी के इस हिस्से पर साहिर ख़ूब हँसा. हँस-हँस कर बोलता रहा. ‘बच्चे को बाप जी बोलता है...’

फिर गंभीर होकर उसने पूछा, ‘बच्चे को तो कोई प्रॉब्लम नहीं थी न, फिर मिरदंगिया को क्यों पीटा?’

मुझे कोई जवाब नहीं सूझा. या, जवाब तो मुझे मालूम था पर एक बच्चे को कैसे बताया जाए, नहीं मालूम.


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