Thursday, October 1, 2015

जलन

छह सात दिन पहले की बात है. साहिर पूर्वा दी के यहाँ गया था. शिउली उस समय स्कूल गई हुई थी. 

पूर्वा दी जेवंती को बता रही थीं, ‘आजकल शिउली को न इससे बहुत जलन होती है.’ साहिर वहीं पर शिउली की छोटी साइकिल चला रहा था. 

उनकी बात सुनकर वो बोला,’ हमको भी बहुत जलन होती है.’ तीन साल के साहिर से ये बात सुन सभी हँसने लगे. 

जेवंती ने हँसते हुए पूछा,’ कहाँ जलन होती है बाबू ?’ 

साहिर ने अपनी ऊँगली दिखाकर कहा,’ यहाँ होती है जलन, अगरबत्ती से’.
(10.12.2008.)


मेरी मौसी तुम्हारी नानी 


आज बड़की मौसी से साहिर को मिलवाया. उसे बताया,’ साहिर ये तुम्हारी नानी हुईं’.

उसने पूछा, ‘ और तुम्हारी’?.

मैंने कहा,’ मेरी मौसी हैं’.

उसने कहा, ’अच्छा’.

अगली सुबह उठते ही साहिर कुछ हिसाब-किताब करने लगा. थोड़ी देर बाद उसने कहा,’ तुम्हारी मौसी मेरी नानी तो मेरी मौसी भी तो तुम्हारी नानी हुईं’.

मैंने कहा, ‘नहीं साहिर! वो मेरी बहन हुईं.’

‘नहीं मम्मा, देखो, तुम्हारी मौसी मेरी नानी, मेरी मौसी तुम्हारी नानी.'  साहिर ने सीधा सा तर्क दिया.  

मैं हँसते हुए कहती रही, ‘नsss तुम्हारी मौसी मेरी बहन, मेरी मौसी तुम्हारी नानी.’ साहिर बहुत देर तक अपना तर्क देता रहा और मैं उसे रिश्तों की नामावली समझाती रही.

साहिर हैरान परेशान हमें देख रहा था. उसका चेहरा पढ़कर लग रहा था मानो कह रहा हो, ‘गोरखधंधा है मम्मा...इस दुनिया में सब कुछ उल्टा-पुल्टा है!'
(18.02.09)



2 comments:

  1. ye rishtey to mujhey abhi tak samagh nahi aatey,kiska kya rishta hai.sab kuch sahir jaisa hi rahta hai.

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  2. ye rishtey to mujhey abhi tak samagh nahi aatey,kiska kya rishta hai.sab kuch sahir jaisa hi rahta hai.

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