Thursday, July 9, 2015

चुलबुल पांडे, अं हयं, बड़का न...!

आज दो पोस्ट :) क्यों? बस यूँ ही, मन हुआ...

अगर हमने एक मिनट में नल से चार ग्लास पानी भरे तो साठ मिनट में...240 ग्लास... यानी एक घंटे में 240 ग्लास तो 24 घंटे में...5760 ग्लास..तो फिर 30 दिनों में..172800 ग्लास...और नल अगर एक मिनट में 25 ग्लास पानी भरता है तो? आप ठहर जाएँ, ये हिसाब किताब बिट्टू पांडे को करने दें. ये उसके लिए बाएं हाथ का खेल है. 

बिट्टू छठी क्लास में पढता है और छह महीने पहले ही कमला नेहरु शिशु विहार में दाखिल हुआ है. यहाँ से पहले वो गाँव में पढता था. स्कूल की डायरी से लेकर हर किताब में उसकी दिलचस्पी है. स्कूल की ज़मीन कैसे मिली, मज़हर-उल-हक़ कौन थे, बिहार विद्यापीठ और स्कूल का क्या संबंध है.. उसे सब पता है! ऐसे में समर कैंप के पहले ही दिन बिट्टू छा गया.

समर कैंप में आये बच्चों ने ही उसका नाम चुलबुल पांडे रखा और कभी-कभी वे उसे ‘पांडेजी’ ‘पांडेजी’ कहकर भी बुलाते. अपने नाम में ‘जी’ लगा सुन बिट्टू ज़रा सीना तान कर चलता, मुस्कुराता और कभी कभी सलमान खान माफ़िक अपने बालों पर हाथ फेरता.

मगर कुछ ऐसे थे जो उसकी पीठ पीछे बोलते—‘हमलोग में कोई हियाँ छे साल से है कोई दस साल से...मगर नहीं..पूछ तो चुलबुले पांडे का है..छे महिना उसको होएबे किया है और देखो वही स्कूल के बारे में बता रहा है. हमलोग को एक दिन दे दीजिए हमलोग भी डायरी रट कर आ जाएंगे. बड़का न आया चुलबुल पांडे’.

उनकी बातें सुन अपने दिन याद आ गए जब दूसरों के हुनर देख तड़पते थे और यही कहते थे—अं हयं, बड़का न...!’



जूता  (27.11.2008)

साहिर का जूता एक जगह से फट गया है. उसने कहा – ‘मम्मा, अब इसको दर्ज़ी के पास ले जाना पड़ेगा’.

मैंने कहा- ‘नहीं, दर्ज़ी के यहाँ नहीं कहीं और ले जाना पड़ेगा.’


उसने कहा,-‘ हाँ$$$$, मम्मा ये पंचर हो गया है. इसका पंचर बनवाना पड़ेगा’.

1 comment:

  1. Bahut acchi lagi yah katha...
    Kahani ko isi tarah aage barhate rahen

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