Sunday, July 12, 2015

कनाडा वाली नबीहा


रमज़ान का महीना है. पिछला घर बहुत याद आ रहा है. बिल्डिंग में कुछ परिवार रमज़ान में ही आते थे और ईद मनाकर चले जाते थे. उनमें से एक परिवार नबीहा का है.

2011 की बात है. नबीहा तब छह साल की थी. वो ईद मनाने अपने नाना-नानी के साथ आई थी. ख़ास बात ये थी कि वो ‘खनेडा’ (कनाडा) से आयी थी. भूरे बाल, गुलाबी गाल और गुलाबी फ्रॉक के साथ वो बिल्कुल गुड़िया दिखती. उसके बोलने का अंदाज़ भी बाक़ी बच्चों से जुदा था, एकदम मेम वाला. बिल्डिंग के ज़्यादातर लड़के, जो उसके हमउम्र थे, उसपर फ़िदा थे. वो अक्सर दाँतों से नाख़ून कुतरती और बात बात में pretty-pretty बोलती.

उसके किसी रिश्तेदार ने उसे एक ख़रगोश दिया था. उसने उसका नाम ‘बनी’ रखा. बिल्डिंग में कुछ के पास कुत्ता था और एक के पास एक तोता. मगर ये पहली बार था कि किसी के पास ख़रगोश आया हो. बिल्कुल रुई के गोले सा सफ़ेद बनी! सभी बच्चे उसके ‘बनी’ को देखना चाहते थे. नबीहा भी ख़ुश होकर सभी बच्चों को अपना बनी दिखाती पर जब भीड़ ज़्यादा हो जाती तब डांट कर कहती-‘ चलो भागो सब. अब बनी रेस्ट करेगा.’

एक दिन जब वो बच्चों को भगाने के लिए डांट रही थी तब एक लड़के ने कह दिया –‘छी! छी! कितना गन्दा है तुम्हारा बनी’. दूसरे ने सुझाया,’ चलो-चलो इसको नहलाते हैं’. बस फिर क्या था—बच्चों ने मिलकर बनी को ख़ूब नहलाया. नतीजा, दो-तीन दिनों में बनी मर गया.

सारे बच्चे शॉक में थे. उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा था कि इतना प्यारा बनी आख़िर मर कैसे सकता है! बहुत भारी मन से उन्होंने नीचे के पार्क में उसे दफ़नाया. क़ब्र पर फूल चढ़ाए और दो मिनट का मौन रखा. क़ब्र को ख़ास बनाने के लिए पत्तों से घेर भी दिया. ख़रगोश को दफ़नाए अभी घंटा भर ही हुआ था कि एक लड़का भागता-भागता हमारे घर आया. उसने साहिर के कान में कुछ ‘फुस फुस’ किया और साहिर ‘ मम्मा अभी आए’ बोलकर भागा. लगभग घंटे भर बाद साहिर घर आया मगर पूछने पर उसने कुछ भी नहीं बताया. हाँ ! उसके पीछे बिल्डिंग का गार्ड ज़रूर दौड़ता हुआ आया. उसने शिकायत की-‘ देखिए मैडम, एक तो सब के सब मिलके ख़रगोश को नहला -नहला के मार दिया अब  दफ़नाने के बाद निकाल-निकाल के देख रहा है कि कहीं जिन्दा तो नहीं है?’

नबीहा लड़कों से नाराज़ थी, हालांकि खरगोश को नहलाने में वो भी शामिल थी. उसने लगभग सभी  के यहाँ आना- जाना बंद कर दिया. बस कुछ ख़ास थे जिनके यहाँ वो अपनी pretty pretty फ्रॉक पहन कर जाती और बाक़ियों को नाख़ून कुतरते हुए कह देती,’ भुत गंदे हो तुम लोग’.

इसका नतीजा नबीहा के नाना की कार को भुगतना पड़ा था. दो-तीन लड़कों ने उनकी निहायत ही ख़ूबसूरत काली गाड़ी की छत पर चढ़कर कूदा-कूदी की. कार की छत पिचक गई. एक और लड़का, जिसके घर नबीहा जाती थी, भी बाक़ी लड़कों के ग़ुस्से की चपेट में आया. उसके अब्बू की गाड़ी पर साइकिल गिरा कर स्क्रैच लगाया गया.


मामला गंभीर हो गया था, इसलिए गार्ड ने ‘Bell Bajao’ अभियान चलाया. सोसाइटी के सचिव-अध्यक्ष सभी गरजे-ग़ुर्राए. लड़के अपने-अपने घरों में दुबके रहे – उनके माँ-बाप माफ़ी मांगते, झल्लाते-घुरघुराते घर वापस आए. एक-दो बच्चे को तो “विटामिन” (पिटाई) भी मिला. बाक़ी कुछ अरसे दुबके रहे. मामला जैसे-तैसे शांत हुआ. पर फिर से वही धमाल-वही मस्ती. नबीहा ने न जाने क्या सोचकर उन “गंदे” बच्चों को माफ़ कर दिया सो झगड़े की एक बड़ी वजह ख़त्म हो गई. बच्चों को छोड़िये, बड़ों ने भी राहत की सांस ली.

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