Wednesday, July 1, 2015

बुद्ध साहिर


आज सुबह मैंने किसी बात पर साहिर को shame shame कहा. सुनते ही उसने कहा,’ वैन में तो सब हमको शेम शेम बोलते ही हैं, अब तुम मत बोलो.’ मैंने वैन के बारे में पूछा तो उसने बताया—‘वो सब हमको चिढाते हैं’.

मैंने पूछा,’ क्यों चिढाते हैं?’

उसने कुछ गुस्से में ही कहा, ‘ बस चिढाते हैं!’

मैंने कहा – तुम मत चिढ़ा करो वो चिढ़ायेंगे ही नहीं. फिर मैंने उसे बुद्ध की एक कहानी सुनानी शुरू की.

‘साहिर, बहुत साल पहले एक आदमी थे. उनका नाम था बुद्ध. वो लोगों को अच्छी अच्छी बातें बताया करते थे. लोगों से वो प्यार करते थे और लोग भी उनसे बहुत प्यार करते थे. कई बार वो क्या करते कि पालथी मार के बैठते और अपनी आँखें बंद कर लेते. और फिर वो अपनी सांस पर ध्यान देते रहते. यानी करते ये कि हवा नाक से लेते, कुछ पल अपने अन्दर रखते और फिर मुंह से निकाल देते.’

साहिर मेरी नक़ल उतरने लगा. हवा नाक से लेता, उसे रोकता और फिर फु$$श की आवाज़ के साथ बाहर निकाल  देता. कहानी से ज़्यादा उसे इस काम में मज़ा आ रहा था.मैंने कहानी आगे बढाई..

‘एक दिन बुद्ध ऐसे ही पालथी मार के आँखें बंद करके बैठे हुए थे. इतने में एक आदमी न जाने कहाँ से आया और उनको बुरी बुरी बात बोलने लगा. बुद्ध तो उस वक़्त ध्यान में बैठे थे, ऐसे आँखें बंद करके’—मैंने साहिर को बताया.

‘हाँ$$$ वो फु$$श फु$$श करके हवा निकाल रहे थे’—साहिर ने कहानी आगे बढ़ाई. मैंने कहा, ‘हाँ, फिर उन्होंने धीरे से आँखें खोलीं और मुस्कुराने लगे. उस आदमी ने बुद्ध को खूब भला बुरा कहा और जब बोल बोल कर थक गया तो लौट गया. बुद्ध के कुछ स्टूडेंट भी वहां पर थे. जब वो आदमी लौट गया तो वो लोग बुद्ध के पास आये और पूछने लगे,’ उसने आपको इतना बुरा भला कहा, इतनी गालियाँ दीं, आपने उसे कुछ कहा क्यों नहीं? सवाल सुन कर बुद्ध थोड़ा और मुस्कुराए और बोले,’ अच्छा! एक बात बताओ.अगर तुम्हारे लिए कोई तोहफ़ा लेकर आये और तुम उसे न लो तो वो किसका हुआ?’

साहिर ने तपाक से जवाब दिया,’ वो तो उसी आदमी का हुआ’.

‘ हूँ$$ यानी अगर हमें कोई चिढ़ाए, बुरा बोले, गाली दे और उसे हम ना लें तो वो किसका हुआ?’ मैंने साहिर से पूछा.

साहिर ने ताली बजाई और कहा,’ यानी मम्मा बाबा जो डांटते हैं वो सब उन्हीं का हो जाता है.!!! ये कहते वक़्त साहिर की आँखें खूब चमक रही थीं.
(01.04.11.)

2 comments:

  1. यह पोस्ट काफ़ी अहम है क्योंकि हमलोग अक्सर बच्चों को जाने-अनजाने, चाहे-अनचाहे shame shame trauma में डाल देते हैं बिना यह सोचे कि बच्चा उस trauma से कैसे deal करेगा या कर पायेगा या नहीं. हमें तो शायद सिर्फ़ अपनी बात मनवानी होती है. हम शायद यह नहीं सोच पाते कि इससे हम बच्चे के मन में उसकी किस तरह की छवि बना रहे हैं. साहिर ने इसकी मुखालिफ़त की है और ऐलान किया है कि किसी भी फ़िज़ूल कमेंट को नज़रंदाज़ करेगा.
    Disciplining के ऐतबार से यह हमारे लिए चुनौती ज़रूर थी लेकिन हम उसके जज़्बे के साथ हैं...

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  2. Bahut hi prasangik...
    Blog ka title sateek laga
    Is rachnatmakta ko jari rakho...

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