Sunday, August 21, 2016

Tell me Why


आज सुबह साहिर और मैं स्कूल जाने के लिए दरवाज़े से बाहर निकले. बाहर निकलते ही साहिर की पसंदीदा पत्रिका ‘Tell me why’ दिख गई. अख़बार वाला उसे दरवाज़े पर छोड़ गया था. साहिर की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. वह भाग कर अन्दर गया और एक और ‘Tell me why’ ले आया. बोला, ‘देखो, अब मेरे पास दो  independence day  स्पेशल है. पिछले साल भी कवर पेज पर गाँधी जी थे, इस साल भी हैं.’

वह दोनों अंक लेकर गाड़ी में बैठा. नए वाले से वह ‘बूझो तो जाने’ पज़ल बनाने की कोशिश करने लगा. बीच–बीच में पूछता जा रहा था, ‘देखो तो मम्मा ये जगन्नाथ मिश्रा हैं, ये डॉ राजेंद्र प्रसाद हैं... ये ये हैं...ये वो हैं.’ अपनी जानकारी के अनुसार मैं उसके सवालों के जवाब दे रही थी. न मालूम होने की स्थिति में वह कहता, ‘हूँsss मुश्किल है, गूगल करना होगा.’ थोड़ी देर बाद मुस्कुराकर बोला, ‘मम्मा पज़ल हम हर बार भर कर भेजते रहेंगे. आख़िर कोई कब तक हमको प्राइज़ नहीं देगा?’

साहिर उस किताब में ऐसे खोया कि भूल ही गया कि आज उसकी साइंस की परीक्षा थी. स्कूल के गेट पर मैंने गाड़ी रोकी और कहा, ‘ चलो अपना बैग निकालो और भागो स्कूल के अंदर. ख़ूब अच्छे से परीक्षा देना. सवाल अच्छे से दो बार पढ़ना और फिर लिखना.’

साहिर पीछे मुड़ा और चीखा, ‘बैsssगsss.’

अब चीखने की बारी मेरी थी. ‘बैग क्या हुआ?’ पीछे की सीट पर बैग न पाकर मैं परेशान हो रही थी.

साहिर ने उसी अंदाज़ में पूछा, ‘ तुमने रखा नहीं था क्या?’

माजरा समझ  में आते ही मैंने कहा, ‘ न राइटिंग बोर्ड, न पानी, न पेन-पेंसिल... तुम्हारे पास तो कुछ नहीं है. अब?’ पिछले दिनों वह बीमार था. इसलिए मैं बाहर का पानी उसे देना नहीं चाह रही थी.

मैंने फ़ौरन पास में ही रहने वाली अपनी दोस्त गुंजन को फ़ोन मिलाया और उससे ये सारी चीज़ें तैयार रखने को कहा. मैंने गाड़ी उसके घर की ओर भगाई. गुंजन इन सब के साथ अपने गेट पर तैयार थी. मैंने झटपट वहाँ से ये सामान उठाया और वापस स्कूल की तरफ़ मुड़ी.

रास्ते में मैंने घड़ी देखी और कुछ नाराज़गी और कुछ मायूसी से कहा, ‘उफ़! देर हो गई.’

साहिर जो अब तक चुप था बोला, ‘ मम्मा, एक राइटिंग बोर्ड तो स्कूल में ही रहता है. पेन तो कोई भी दे देता. और पानी की ज़रुरत एक घंटे में होती कहाँ है!’

मेरे मुँह से कराह निकली, ‘आsssह!’

साहिर सांत्वना देते हुए बोला, ‘कोई बात नहीं मम्मा. कभी-कभी सबसे ग़लती हो जाती है. आज तुमसे हो गई.’

सिवाए इसके मैं क्या कहूँ... Tell me why?

(10.08.16)

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