उसकी
आँखों को देख ऐसा लगता है जैसे इबादत में डूबी हों. होठों पर हर वक़्त
मुस्कुराहट, ख़ासकर दोनों किनारों पर. लगता है जैसे वहीं आकर चुप से बैठ गई हो.
मैं
उससे मिली ज़रूर हूँ, पर बहुत कम बार. ज़्यादातर
उसके किस्से सुने हैं. जितना सुनती हूँ उतना ही हैरान होती हूँ.
अभी
वह आठ साल का है . प्यार से सब उसे बाबू बुलाते हैं. एक दिन की बात है. जब बाबू
खेल कर घर में घुसा उसके चेहरे पर सूजन थी. सूजन कुछ ज़्यादा थी. एक के बाद एक सबने
उससे सवाल किए—‘क्या हुआ? कैसे चोट लग गई?’ उसने सबको बार-बार यही बताया कि उसका
पैर फिसल गया और वह ज़ोर से गिर गया और उसे ज़ोर से चोट लग गई.
शाम
में गली के एक लड़के ने बता दिया कि वह गिरा नहीं बल्कि एक लड़के ने उसे मारा है. सब
अब बाबू से पूछ रहे थे कि उसने सही बात क्यों नहीं बताई? होठों पर वैसी ही मुस्कान
लिए वह बोला, ‘जो होना था सो तो हो गया था. चोट तो लग चुकी थी. बता देते तो क्या
होता? पापा को गुस्सा आता. सबको गुस्सा आता...’
‘अरेsss! इतनी चोट लगी है फिर भी तुमने नहीं बताया?’ आपू ने ग़ुस्सा जताते हुए कहा.
‘हमको
तो चोट लग ही चुकी थी. आपलोग उसकी मम्मी से शिकायत करते तो उसको मार पड़ती और उसको भी चोट लग
जाती न!’ बाबू ने अपनी परेशानी ज़ाहिर की.
पिछले
साल की बात है. नदी किनारे वह अपने चाचू के साथ चुपचाप बैठा था. बहुत देर तक वह
नदी को देखता रहा. फिर बोला, ‘देखिए तो
चाचू, नदी कैसे चुपचाप चली जा रही है. कोई इसमें नहा रहा है. कोई मछली पकड़ रहा है. कोई नाव चला रहा है. कोई कपड़ा धो
रहा है... लेकिन नदी किसी से कुछ नहीं माँगती... बस चुपचाप चली जा रही है.’
चाचू अपने इस सौम्य भतीजे को देखते रहे.
कुछ पल दोनों की आँखें ही एक दूसरे से संवाद करती रहीं. फिर चाचू शब्दों में उतरे.
बोले, ‘हाँsss अब देखो न पेड़ भी कहाँ किसी से कुछ माँगता है. पर सबको देता रहता
है.’
भतीजे
ने मुस्कुराकर कहा, ‘हाँsss! जब पेड़ बच्चा होता है तब पानी माँगता है. बड़ा हो
जाने के बाद कहाँ किसी से कुछ माँगता है!’
...‘बड़ा हो जाने के बाद कहाँ कुछ माँगता है’
उसकी इस बात पर मन बार-बार अटकता है. मैं सोच में पड़ी हूँ कहीं ये किसी संत का
पुनर्जन्म तो नहीं! कहीं ये रूमी के गुरु शम्स तबरेज़ तो नहीं!
you have this amazing skill to capture the audience attention towards your stories!
ReplyDeleteबच्चे और बच्चो की बाते, अनोखी तो होती ही है, लेकिन अगर उसे, तरीके लिखा जाये वह भी, रोज़्मर्रा की बातो को पन्क्तिबध्ध की जाये तो क्या कहने। हर बार, हर घटना से एक नयी कहानी का जन्म अपने आपमे उल्लेख्ननीय है॥ बहुत बधाई।
ReplyDelete